धनतेरस क्यों मनाते हैं। क्या है धनतेरस के दिन नये आभूषण खरीदने की प्रथा?

Why celebrate Dhanteras? What is the custom of buying new jewelry on the day of Dhanteras? धनतेरस के दिन झाड़ू क्यों खरीदा जाता है?

 

 

आज के इस समय में सभी को एक अच्छे स्वास्थ्य और एक अच्छी आर्थिक स्थिति की जरूरत पड़ती है और ऐसा इस धरती पर कोई भी नहीं है जिसे इन दोनों चीजों की जरूरत ना पड़ती हो , मगर कैसे आप इन दोनों ही चीज को पा सकते हैं आपके पास एक अच्छा स्वास्थ्य हो और साथ ही आपकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहे इसके लिए क्या उपाय हो सकते हैं।

 

मगर क्या आपको यह पता है कि धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करके आप इन दोनों ही चीजों को पा सकते हैं।

 



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धनतेरस का शाब्दिक अर्थ क्या है ?

 

यहां ‘धन’ का अर्थ है धन और ‘तेरस’ का अर्थ है 13वां दिन।  हर साल, जैसा कि आप जानते हैं की पांच दिवसीय दिवाली का त्योहार धनतेरस के उत्सव के साथ शुरू होता है।  यह त्योहार कार्तिक मास (माह) में कृष्ण पक्ष के तेरहवें चंद्र दिवस पर मनाया जाता है।  इसी कारण से धनतेरस को धन्वंतरि त्रयोदशी या धनत्रयोदशी भी कहा जाता है।  हिंदू कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस अक्टूबर-नवंबर के दौरान आता है। धनतेरस का त्यौहार हिंदू मान्यता के अनुसार बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन से भारत के सबसे बड़े त्यौहार जो कि पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है दीपावली या दिवाली की शुरुआत होती है।

 

धनतेरस के त्यौहार की अपनी एक मान्यता है चूँकि यह पांच दिवसीय दिवाली के त्यौहार का प्रथम दिन होता है तो इसकी एक अपनी अलग मान्यता होती है। जैसा कि आप जानते हैं की दिवाली का पर्व प्रकाश का प्रभाव कहा जाता है यह अंधकार में प्रकाश की विजय स्वरूप में दर्शाया जाता है और धनतेरस के दिन से ही इसकी शुरुआत मानी जाती है। धनतेरस का त्यौहार व्यापारी और व्यापारिक लोगों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है जैसा की प्रथा है इस दिन किसी ने किसी कीमती वस्तुओं का क्रय विक्रय किया जाता है ज्यादातर लोग अपने लिए सोने चांदी व अन्य कीमती वस्तु और धातु को खरीदना पसंद करते हैं तो इस दिन व्यापार भी बहुत अधिक होता है।

 

हर त्यौहार को मनाने की अपनी एक अलग मजा होती है तो आइए जानते हैं धनतेरस को क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे की कहानी क्या है।

 

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धनतेरस क्यों मनाया जाता है?

 

इसके पीछे दो सबसे प्रसिद्ध किंवदंतियाँ हैं जो धनतेरस के उत्सव से जुड़ी हैं।  वे इस प्रकार हैं:

 

1.भगवान यम की कथा



कहानी की शुरुआत हिमा नाम के एक राजा से होती है।  उनका एक बेटा था, जिसकी शादी के ठीक बाद सांप के काटने से मौत की भविष्यवाणी की गई थी। यह जानकर राजकुमार की पत्नी अपने पति की जान बचाने के लिए आतुर हो गई। उन्होंने रात भर अपने पति को सोने नहीं दिया।  चूंकि मृत्यु अंधकार का पर्याय है, इसलिए उसने दीये, मोमबत्ती जलाई और अपने गहनों का एक बड़ा ढेर बनाया।  उसने सभी कीमती पत्थर, हीरे, चांदी, सोना, जो कुछ भी मूल्यवान था, उसे इकट्ठा किया।  इन सबके साथ, उन्होंने राजकुमार को सोने से रोकने के लिए गाने गाए और कहानियाँ सुनाईं।



भगवान यम (मृत्यु के देवता) राजकुमार के जीवन को सांप के रूप में लेने के लिए प्रकट हुए।  लेकिन, वह ऐसा करने में असमर्थ थे, क्योंकि तेज रोशनी और सोने के ढेर ने उनके रास्ते में एक बाधा के रूप में काम किया।  इसलिए, भगवान यम घर में प्रवेश नहीं कर सके और राजकुमार को उसकी नियत मृत्यु से बचा लिया गया।  तब से, इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है और इसे ‘यमदीपदान’ नाम भी दिया जाता है क्योंकि भगवान यम की पूजा करने के लिए दीपक जलाए जाते हैं।



2 . धन्वंतरि की कथा

 

 समुद्र मंथन (दूध के सागर का मंथन) के समय, यह निर्णय लिया गया था कि अमृत (अमर अमृत) सहित जो कुछ भी निकलेगा, उसे देवों (देवताओं) और असुरों (राक्षसों) में समान रूप से विभाजित किया जाएगा।

 

 भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन करते हुए अमृत का घड़ा लेकर निकले।  देवता अपनी कला से अमृत (अमर अमृत) प्राप्त करने में सक्षम थे।  भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु के अवतार के रूप में माना जाता है और उन्हें उपचार करने वाले देवता या चिकित्सक के रूप में भी पूजा जाता है।  इस घटना के बाद, लोगों को ठीक करने का प्राकृतिक तरीका खोजा गया।  चिकित्सा का यह तरीका आज के समय में आयुर्वेद के नाम से लोकप्रिय है।



इस तरह इन दो हिंदू पौराणिक घटनाओं के कारण और उनसे जुड़ी मान्यताओं के कारण धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है।

 

 

धनतेरस का उत्सव कैसे मनाया जाता है?

 

धन्वंतरि त्रयोदशी का त्यौहार पूरे देश में बहुत ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।  धनतेरस का उत्सव हिंदू समुदाय में विशेष रूप से बहुत ही शुभ फल देने वाला और सुख समृद्धि के लिए पूजा पाठ के लिए उचित माना जाता है।  धनतेरस के दिन, भगवान गणेश और कुबेर के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।  विशेष घी के दीये जलाए जाते हैं, मिठाइयां तैयार की जाती हैं और भजन (भक्ति गीत) गाए जाते हैं।

 

धनतेरस का त्योहार एक ऐसा दिन है जब लोग अपने नए व्यावसायिक उपक्रमों या परियोजनाओं का उद्घाटन करते हैं।  लोग नई कार, सोना, चांदी, गहने, नए कपड़े और भी बहुत कुछ खरीदकर धनतेरस मनाते हैं।  इस धनतेरस, शुभता और समृद्धि के संकेत के रूप में आप क्या खरीदना चाहते हैं, इसकी योजना बनाना न भूलें। तो पाठकों आप अपनी शॉपिंग के लिस्ट तैयार करें और धनतेरस के दिन जो भी आवश्यक वस्तुएं अपने घर के लिए या अपने रिश्तेदारों के लिए खरीदना चाहते हैं उसकी एक लिस्ट तैयार करें और धनतेरस के दिन खूब खरीदारी करें।



धनतेरस की तैयारी कैसे करें?

 

दोस्तों दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव के दौरान, लोग धनतेरस के दिन के लिए खुद को तैयार करते हैं।  वे दीवाली पर अपने घरों में देवी लक्ष्मी के आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं और धनतेरस इसके लिए पहला शुभ कदम है।  दिवाली के पहले दिन लोग अपने घरों की मरम्मत और सजावट करके देवी का स्वागत करते हैं।

 

धनतेरस की तैयारी के दौरान आप, दीये (दीप), दीये और मोमबत्तियां जलाना न भूलें।  अपने घरों के प्रवेश द्वार पर विशेष रंगोली (सजावटी पैटर्न) तैयार करें।  देवी लक्ष्मी के छोटे पैरों के निशान लगाएं, इससे यह दर्शाता है कि देवी लक्ष्मी धनतेरस पर आपके घर में प्रवेश कर रही है।



इसके अलावे धनतेरस के दौरान इन तैयारियों के साथ, अपने प्रियजनों के लिए कुछ उपहार खरीदना न भूलें। आइए आपको बताते हैं कि इस धन्वंतरि त्रयोदशी पर आप अपने रिश्तेदारों भाई बंधुओं और प्रिय जनों को क्या उपहार दे सकते हैं।


धनतेरस पर क्या गिफ्ट करें?

5 दिनों तक चलने वाले दीपावली के त्यौहार पर अपने रिश्तेदारों या जान पहचान के लिए तोहफा देने की परंपरा रही है ऐसे में आपके लिए यह जानने का विषय है कि आप कौन से ऐसे गिफ्ट अपने प्रियजनों को दे सकते हैं।

 

  • लक्ष्मी गणेश की चांदी के सिक्के भी धनतेरस के दिन आप अपने रिश्तेदारों को दे सकते हैं ऐसी मान्यता है कि यह शुभता का प्रतीक माना जाता है चांदी के लक्ष्मी गणेश की सिक्के देने से आपके रिश्तेदारों के लिए यह लकी साबित हो सकता है तो आप धनतेरस के दिन लक्ष्मी गणेश की चांदी के सिक्के दे सकते हैं।

 

  • अगर आपका बजट थोड़ा बड़ा है तो फिर आप देवी लक्ष्मी और श्रीगणेश के मूर्तियां भी जो की चांदी की रहेगी दे सकते हैं।

 

  • सभी लोगों की जरूरत है अलग होती हैं ऐसे में आपको यह समझना होगा कि आप अपने रिश्तेदार या प्रिय जनों के लिए जो गिफ्ट लेकर आ रहे हैं वह उनके लिए उपयोगी साबित हो तो ऐसे में आप पीतल के बर्तन या स्टील के बर्तन आपकी जैसे भी बजट हो उस अनुसार उन्हें दे सकते हैं। यह बर्तन उनके उपयोग में आएगा और वे इस बात से खुश भी होंगे तो गिफ्ट का चुनाव करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें कि वह सामने वाले के लिए उपयोगी जरूर हो।

 

  • अगर आप किसी बच्चे को कोई गिफ्ट देना चाहते हैं तो धनतेरस के दिन आप घर पर बनी मिठाइयां या चॉकलेट भी दे सकते हैं हालांकि बाजार में बहुत सारे ऑप्शन आपको मिल जाएंगे मगर जहां तक संभव हो तो घर पर बनी मिठाईयां और चॉकलेट उन्हें दें इससे भी खुश हो जाएंगे और उनकी सेहत पर भी इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

  • आजकल दिवाली के मौके पर या धनतेरस के मौके पर लोगों को गिफ्ट देने के लिए की वाउचर्स और गिफ्ट हैंपर की प्रथा बहुत ज्यादा है ऐसे में आप ऐमेजोनिया फ्लिपकार्ट पर ई वाउचर खरीद सकते हैं और अपने रिश्तेदारों को दे सकते हैं ताकि वह अपनी पसंद की वस्तुएं धनतेरस के वक्त खरीद सकें और जो उनको वास्तविकता में लाभ पहुंचाएं।

 

  • दिवाली और धनतेरस का त्यौहार छोटे व्यापारियों और बहुत ही गरीब तबके के लोगों के लिए भी एक अवसर होता है जहां वह हाथ से बनी हुई बहुत सारी कलाकृतियां मूर्तियां दिए और भी बहुत सारे ऐसे आवश्यकता की वस्तुएं बनाते हैं ऐसे में आपको यह भी देखना चाहिए कि आप उन छोटे व्यापारियों और गरीब तबके के लोगों के लिए इस दिवाली के अवसर पर कुछ मदद कर सके। जहां तक संभव हो आप मिट्टी के लिए खरीदे हैं और उन्हें अपने रिश्तेदारों को दें इससे एक तो पर्यावरण पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और उन लोगों के लिए भी सहायता हो जाएगी जो दिवाली धनतेरस के दिन कुछ रोजी रोटी कमाना चाहते हैं और अपने परिवार के लिए दिवाली के अवसर पर कुछ करना चाहते हैं।

तो इस तरह से धनतेरस के दिन आप अपनी आवश्यकता के अनुसार कोई भी ऐसी वस्तु हो या सोने चांदी के आभूषण खरीद सकते हैं और उन्हें अपने रिश्तेदारों मित्रों या अपने प्रिय जनों को गिफ्ट के तौर पर दे सकते हैं।

 

उपहार एक व्यक्ति की मुझे पसंद हो सकती हैं, क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होता है। धनतेरस आशा, कल्याण और समृद्धि का त्योहार है। हर साल धनतेरस का त्योहार दुनिया भर के लोगों के लिए नई संभावनाएं लेकर आता है।

 

व्यापारिक वर्ग के लोगों के लिए धनतेरस की महत्ता।

 

धनतेरस किसी भी नए कार्य को करने और नई वस्तुओं की खरीदारी के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।  विशेष रूप से, व्यापारिक समुदाय के लिए, यह दिन नई परियोजनाओं में निवेश करने, खरीदने और निर्माण करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।  ऐसा माना जाता है कि धनत्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं और सभी को धन और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

 

धनतेरस के दिन आपको क्या करना चाहिए या इस दिन आपको आध्यात्मिक रूप से कैसा रहना चाहिए।

 

धनतेरस केवल धन की प्राप्ति का दिन नहीं है, बल्कि उस ज्ञान और पवित्रता को दिल में बसाने का भी दिन है।  यह हमेशा कहा जाता है कि यदि ईश्वर के प्रति आपकी आस्था, भक्ति और समर्पण शुद्ध है, तो वह आपकी रक्षा और आशीर्वाद के लिए हमेशा मौजूद रहेंगे।

 

 तो, इस धनतेरस पर ज्ञान का दीपक जलाएं और इस धनत्रयोदशी के दौरान लक्ष्मी-कुबेर का आशीर्वाद लें।

 

2021 में धनतेरस कब है?

 

2021 में धनतेरस पूरे भारत और अन्य देशों में 2 नवंबर को मनाया जायेगा। धनतेरस का पर्व दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है और इस दिन खरीदारी करने का विशेष महत्व बताया गया है।

धनतेरस मुहूर्त :

18:18:22 से 20:11:20 तक

अवधि :

1 घंटे 52 मिनट

प्रदोष काल :

17:35:38 से 20:11:20 तक

वृषभ काल :

18:18:22 से 20:14:13 तक

 

धनतेरस की पूजा विधी

 

  • धनतेरस पर धन्वंतरि देव की षोडशोपचार पूजा का विधान है। षोडशोपचार यानि विधिवत 16 क्रियाओं से पूजा संपन्न करना। इनमें आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन (सुगंधित पेय जल), स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध (केसर-चंदन), पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन (शुद्ध जल), दक्षिणायुक्त तांबूल, आरती, परिक्रमा आदि है।

 

  • इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीये जलाने चाहिए। क्योंकि धनतेरस से ही दीपावली के त्यौहार की शुरुआत होती है।

 

  •  धनतेरस के दिन शाम के समय यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मृत्यु के देवता यमराज के भय से मुक्ति मिलती है।

धनतेरस के दिन झाड़ू क्यों खरीदा जाता है?

 

धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने के पीछे जुड़ी मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि, इससे घर में माँ लक्ष्मी का आगमन होता है, घर से नकारात्मकता दूर होती है, और माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। धनतेरस के दिन हमेशा विषम संख्या में (अर्थात 1, 3, 5) ही झाड़ू खरीदनी चाहिए।



🙏तो आशा है दोस्तों आप को धनतेरस से जुड़ी हुई यह जानकारी बहुत ही अच्छी लगी होगी अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों तक साझा करें और Hindilab.net की टीम की ओर से आपको दिवाली और धनतेरस की ढेर सारी शुभकामनाएं आशा है 2021 का यह दीपावली का त्यौहार और धनतेरस का त्यौहार आपके लिए मंगलमय हो। 🙏

 

 

 

 

 

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